"पैसा"

पैसा सबका यार हो गया है।
पैसा ही तो प्यार हो गया है।।

अपनों से कोई आस नहीं अब।
पैसा ही ऐतबार हो गया है।।

रिश्ते-नाते भूल गए हैं सब।
पैसा ही संसार हो गया है।।

भाई-भाई में फूट पड़ गयी।
पैसा ही तलवार हो गया है।।

श्रम भी झुकता पैसों के आगे।
पैसा ही सरकार हो गया है।।

जो चाहो सारे काम करा लो।
पैसा ही हथियार हो गया है।।

सारी इज्ज़त शोहरत का अब तो।
पैसा ही हकदार हो गया है।।

दुनियाँ में अब सब सरदारों का।
पैसा ही सरदार हो गया है।।

अनिल कुमार "निश्छल"
हमीरपुर (उ०प्र०)