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मुक्तक


संघर्षों से संघर्षों को पथ मिलता हैयानि बेघर को उसका घर मिलता है

झूठे,यार फ़रेबी देखें होंगें दुनिया मेंसुख-दुःख का साथी कब मिलता है

— अनिल कुमार 'निश्छल'
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