राधिका तुम जो बनो श्याम हो जाऊं मैं
सुबह तुम जो बनो शाम हो जाऊं मैं
इश्क़ की राह में मिलना मुश्किल बड़ा
तुम शिरोरेखा बनो नाम हो जाऊं मैं
खुशी से काट लेंगे हम तुम्हारा साथ जो होगा
गमों को बांट लेंगे हम तुम्हारा साथ जो होगा
रहेंगे साथ मिलजुल के भले आए कोई मुश्किल
जख्म सब पाट लेंगे हम तुम्हारा साथ जो होगा
नदी बनकर चली आओ समंदर राह तकता है
हमें अपना बना जाओ समंदर राह तकता है
मिलन की बात है लेकिन नदी फिर कब नदी रहती
चली आओ समा जाओ समंदर राह तकता है
अनिल कुमार निश्छल
हमीरपुर
बुंदेलखंड

