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कुंडलिया मां पर


ममता की माँ खान है, धरती पे भगवान।माँ बिन निर्धन हैं सभी, माँ ही से धनवान।माँ ही से धनवान, जीवन मूल्य सिखलाती।माँ करती कल्याण, सही रास्ते बतलाती।देती जीवनदान,रखती सदा है समता।बाधा आती रहें,छोड़ती कभी न ममता।अनिल कुमार निश्छलशिवनीहमीरपुर बुंदेलखंड

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