इक दिन गोलू की अम्मा ने,
पूड़ी, हलवा, खीर पकाए ।
तभी अचानक हाथी दादा.
दौड़े-दौड़े घर को आए ।
सूँड़ बढ़ाकर पूँछ हिलायी,
मन की सारी बात बतायी।
गोलू बोला अम्मा से तब,
हाथी खाना माँग रहा है।
एक परोसी थाली लाकर,
अम्मा बोली दे दो बेटा
भूखे को भोजन देना तो,
नैतिकता में आता है।
दीन-दुःखी को दान दिया जो,
व्यर्थ भला कब जाता है?
