नींव घर की बनाती रहीं औरतें

इस तरह घर बचाती रहीं औरतें


ज़िस्म का ख़ून दे मुस्कुराती रहीं

दो कुलों को सजाती रहीं औरतें


छोड़कर ख़्वाब का एक प्यारा शहर

दूसरा घर सजाती रहीं औरतें


नेह का घर शज़र जो बिखरने लगे

नेह देकर जिलाती रहीं औरतें


भूख सहकर लबों पे हँसी बस रखें

और सबको खिलाती रहीं औरतें।


मां, बहन,सहचरी रूप होते भले

दौर-रिश्ते निभाती रहीं औरतें


अनिल कुमार ''निश्छल''