पानी से पानी पर आज पानी लिख दूँ
होठों से तेरे होठों पर ये कहानी लिख दूँ
सदियों तक दोहराता रह जाए जिसे ये जमाना
जिंदगी से चुरा कर जिंदगी में उनको जिंदगी लिख दूँ

चन्द शब्दों में दिल की ये बेकरारी लिख दूँ
मिलकर बिछड़ने की ये कहानी लिख दूँ
बहुत टूटा बहुत बिखरा समझ नहीं पाया कि
उनको खिलती सुबह या ढ़लती शाम लिख दूँ. .

कुछ उनकी कुछ अपनी वो पुरानी गुफ्तगू लिख दूँ
मेरे बातों पर उनकी वो मुस्कुराहट लिख दूँ
झुकी पलकों में थीं गजब की शरमाहट
जी करता है तुमको इस दिल की अमानत लिख दूँ....
- कुमार उन्नयन