कहीं कविता सुनाना है कहीं ग़ज़लें सुनानी हैं

कोई पूछेगा जब मुझसे तो फिर बातें बनानी हैं

भला इससे भी बढ़कर अब सितम कुछ और क्या होगा

तुम्हारे बिन भी देखो अब कईं होलीं मनानी हैं


Kumar Satendra

#kumarsatendraks