मेरे घर के आंगन में, एक पेड़ है अमरूद का ।
वह बौना सा एक कोने में खड़ा है;
चुपचाप सा।
उस पर कहीं - कहीं फल हैं, कहीं है पत्ते ।
उसकी डालियाँ कुछ बड़ी हैं कुछ हैं छोटी ;
कुछ बहुत पतली कुछ बहुत मोटी ।
पर मैंने उनको काट - छांटकर एक जैसा
करने की कोशिश नहीं की ।
बस किया है इतना कि एक नियत अंतराल पर,
देता रहा हूँ उसकी जड़ों को खाद और पानी ।
ताकि उसकी डालियों में -
" समरसता आए, नीरवता आए, मधुरसता आए "
- - - Kumar Pushpendra

