ओर भी सुन्दर सजीले हो गये 

कण्ठ से शंकर जो नीले हो गये 


देवो के भी देव जो महादेव है 

काल के भी काल जो महाकाल है

झोला उठाया और छबीले हो गए


जगत भर का शौर्य था जिनके तले 

ध्यान लाया और फकीरे हो गए


मुंड माला और उरग धारण किए

भस्म लाई और अघोरे हो गए


भोलेपन के जिनका कोई तोल ना

भांग पी के और भोले हो गए

            ~ कुमार बृजेश