कत्ल के तुफां से डगमग, दरिया भी किनारे भीजंग की अग्नि में स्वाहा, सचारे भी बिचारे भीनफरतों की बेदी पे ना रक्षकों को टांगो तुम,है अम्न तो महफूज़ सैनिक, हमारे भी तुम्हारे भी
कत्ल के तुफां से डगमग, दरिया भी किनारे भीजंग की अग्नि में स्वाहा, सचारे भी बिचारे भी
नफरतों की बेदी पे ना रक्षकों को टांगो तुम,है अम्न तो महफूज़ सैनिक, हमारे भी तुम्हारे भी