लहरों के जरिए यहां बिलखता समुंदर है

आंखो से बहते दरिया का भी यहीं मंजर है

चेहरे पे मुस्कुराहट, अंदर से बौखलाहट

इक मौसम बरसात का इंसान के भी अंदर है