गिरोगे नहीं तो उठोगे कैसे, 

गिरना भी जरूरी हैं.....

उठके फिर से ना गिर जाओ,

संभलना भी जरूरी है.....

संभल संभल के चलना सीखो,

बढ़ना भी जरूरी है.....

बढ़ते बढ़ते थक ना जाओ,

रुकना भी जरूरी है.....

रुक के फिर तुम बैठ ना जाओ,

चलना भी जरूरी है.....

चलते चलते ठोकर खाओ,

गिरना भी जरूरी है.....

ठोकर खाओ के जीना सीखो,

जीना भी जरूरी है.....

जीतेजी तुम मर ना जाओ,

मरना भी जरूरी है.....

वो कहानी, क्या कहानी,

जो कहानी पूरी है...

ये कहानी, वो कहानी,

जो अब तलक अधूरी है

- कुमार बृजेश