निकल पड़ें हो मंजिल को,

पथ से फिर डरना कैसा

डर - डर के बढ़ना कैसा

रुक - रुक के चलना कैसा

इश्क - विस्क सब लफड़े है?

तो लफड़ों से डरना कैसा

दुनिया दारी सब घुमचक्कर

चक्कर में पड़ना कैसा


मरना है तो मौत बड़ी हो,


पग पग पर मरना कैसा


अपने बने हो जानी दुश्मन


अजी, अपनों से लड़ना कैसा


पहले से हो मौत सुनिश्चित,


बिना लड़े मरना कैसा


© कुमार बृजेश /@bk4usharma