वो जो ईद का चांद है प्यारे,
देखन जिसको तरसे सारे,
खेलों उसके ही गालों से,
तब जानो की होली है।
तेरी भीगीं अंगिया चोली है,
पर बुरा ना मानो होली है।
रंगो की रंगोली है
और आशिक़ की हमजोली है,
बुरा ना मानो होली है।
बालम कुछ ना कर पाए,
मन ही मन जल-भून जाए,
यारा के संग सजनी देखो,
खेले आंख मिचौली है।
सूरत पे नही जाना है,
यहां खुल के रंग लगाना है,
उसको उतना रगडो जिसकी,
सूरत जितनी भोली है।
अबके आना होली में,
संग ले जाना डोली में,
तन में आज विरह की पीड़ा,
पिचकारी में गोली है।
कुमार बृजेश/ @bk4usharma


