किसान


तपती धूप का मौसम हो या ठिठुरन वाली सर्दी का कम्पन हो,

पानी के हर सैलाब को सहना ही जिसका जीवन हो।


सैलाब उठेगा इसके घर में तो लहरें तुमको भी डुबायेंगीं,

छप्पर इसका टूटेगा गर दीवारें महलों की भी चपेट में आयेंगीं।


जितना सम्मान जन्मदाता का होता है उतना ही अन्नदाता का होना चाहिए,

लहलहाती खुशियों को बोने वालों में नफरत का बीज न बोना चाहिए।


राजनीति का दौर भी आज थाली तक जा पहुँचा है,

गहराता कलयुग का स्वार्थ आज हरियाली तक जा पहुँचा है।


सम्मान नहीं दे सकते गर इनको तुम अपमान की राह में तो मत खींचो,

एक बूँद सा अमृत नहीं दे सकते तो जहर से तो इनको मत सींचो।


ANKIT UMRAO