~~~~~~~~~~~ग़ज़ल~~~~~~~~~~~~ बहर/अरकान- फ़ेलुन- फ़ेलुन- फ़ेलुन- फ़ा

वज़्न- २२ - २२ - २२ - २

काफ़िया- "अलिफ़"

रदीफ़- "था"

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आँखों का तो दावा था,

नई रोने का वादा था।


बोला मैंने सीधा था,

तुमने उल्टा समझा था।।१।।


सबकी उँगली मुझ पे थी,

क्या मैं इतना सस्ता था।।२।।


गुस्सा मुझसे तो तुम थी,

मैं कब तुमसे गुस्सा था।।३।।


वो भी तेरे जैसा था,

गमले में जो पौधा था।।४।।


तूफ़ानों की क्या गलती,

मेरा ही घर कच्चा था।।५।।


आंसू मेरे निकले थे,

पल्लू माँ का भीगा था।।६।।

~~क्षितिज रस्तोगी