खामोश सड़कें, भयभीत लोग 

और बाजार में सन्नाटा

वक़्त ने तरकश से 

ये कौनसा तीर चलाया है


बेरोटोक हुम् कुचल रहे थे

इस प्यारी सी दुनिया को

वक़्त ने यह अपना 

रौद्र रूप दिखलाया है।


इस पर भी हम समझ ना पाएं 

तो बहुत देर हो जाएगी

वक़्त ने इस कहर का 

अभी अंश ही बरपाया है 


दो पल रुक कर सोचना होगा

कैसे यह भरपाई करें

वक़्त का सारा खेल है ये

अभी हमको चेताया है।


फिर न ऐसा मौका होगा

अपनी भूल सुधार का

वक़्त की चेतावनी है

एक अवसर हमें दिलवाया है।


        ---सौरभ वैश्य