कुछ गीत लिखुँ ऐसा
जो हर दिल को छू जाये
जो गिले शिक़व हों दरम्यां
उन सब को धो जाए।
कुछ ताल पकड़ूँ ऐसी
कि सारे कलेश मिट जाएँ
जो भी है सब इंसानों के बीच
सारे द्वेष मिट जाएं।
कुछ साज छेड़ूँऐसा
कि हो जाए मौसम सुहाना
और इस हसीं आलम में
हो बस परियों का आना जाना।
कुछ शेर पढूं ऐसे
कि दिल दीवाना हो जाए
मोहब्बत की इन बातों में
समा मस्ताना हो जाए।
इतनी ही तो चाहत है
इतना ही बस हो जाए
एक रामराजी दुनिया का
बस सपना सच हो जाए। ़ े


