आज भी जब आपका सामान देखती हूं 

हसती हूं अपने आसू छूपाती हूं 

खफा हूं आपसे वादा अधुरा छोड गये 

अपनि माँ के लिये इक ख्वाब अधुरा छोड गये

पडा हैं इसमे वो खत जो आपने पढा हीं नहीं  

अब वो बडी हो गयी हैं सलिखेसे दुपट्टा ओढती है 

आपकी ड्रेस को निहारती रेहती हैं 

माँ मैं भी आर्मी जॉईन करुंगी 

देश के लिये अपनी जान कुर्बान करुंगी

इसमे वो राखी भी हैं जिसे कलाई पे बांध ना सके 

तबस्सुम से किया हुआ दावाभी निभा ना सके

माँ तो अबभी सदमे में हैं आपकी राह देखती हैं 

वो जरूर आयेगा मेरे लिये पश्मिना शाल लायेगा 

हर 15 अगस्त को स्कूल में झंडा लेहराने जाती हूं

किसीको पता ना चले इसलिये साडी उधार लाती हूं 

एक मंत्रीजी आये थे एक लिफाफा कुछ कागज लाये थे 

वो भी इसमे संभाल के रखें हैं ना जाणे कब काम जाये 

अब थक गयी हूं काम नहीं होता आपकी कमी खलती हैं 

संभाला हैं फिर भी तमाम नजरोसें आँखों में बस नमी सी रहती हैं