हवा से कह दो

जोर से, सुनाई दे सब को!

तोड़ देना वह बाध,

आज कोई ना रोक पाये तुम्हें.

वह सारी बातें जो तुम मुझसे कभी ना केह पाये.


वह सारे वादे जो तुम करना चाहते थे.

सात वचनों के अलावा भी होते हैं अटूट बंधन.

वह सारे नज़ारे जो तुम मुझे दिखा सकते थे.

वह पहाड़ जो हम साथ चढ सकते थे.


मैं अकसर सोचती हूं..

कहाँ ले जाती वह राह हमें...

जो कहानियाँ रह गयी अधूरी..

जो गीत बीच स्वर खामोश पड़ गये.


कोई शिक्वा नहीं है, ना तुमसे, ना तकदीर से.

जिंदगी ने मुझपर पर्याप्त उपहार बरसाये हैं.

लेकिन है एक जिद्द बाकी..

एक चिंगारी जो बुझने से ईनकार कर रही है.


कह दो हवा से..

तुम्हारी आवाज़ मुझ तक पहुंच जायेगी.