है मानव तेरे जीवन मे 

ये कैसी अभिलाषा है

भोग विलाश में डूबे हो

राम बनने की आशा है



राम बनना है तो त्याग करो

द्वेष छोड़ अनुराग करो

सत्कर्मो की राह चलो

कुकर्मो का त्याग करो


हे मानव अब हुंकार भरो

राम बनो तुम राम बनो

राम बनने की खातिर

अपने किरदारों में राम भरो