घर से सपनों को बांध चला
लेकर मन में उत्साह चला।
जीवन की राह पे चलने को
मन में लेकर उन्माद चला।
जीवन पथ पर में चलने लगा
आती बाधाओं से लड़ने लगा।एक दिन ऐसी बाधा आई
मुझे रुकने पर मजबूर किया।
इसने हम छात्रों के जीवन का
हर सपना चकना-चूर किया।
आर्थिक तंगी की हालत ने
घर आने पर मजबूर किया
लेकर सपना जो चला था मैं
इस ‘कोरोना’ ने उसे चूर किया।


