तुम अपनी जीत से वाक़िफ हो, हम अपनी हार से वाक़िफ हैं।तुम मेरे इजहार से वाक़िफ हो, हम तेरे इनकार से वाक़िफ हैं।डूबा नहीं सकती कोई लहर मेरी काग़ज़ की नाव को,तुम किनारे से वाक़िफ हो, हम मझधार से वाक़िफ हैं।कृष्णा सोलंकी
तुम अपनी जीत से वाक़िफ हो, हम अपनी हार से वाक़िफ हैं।तुम मेरे इजहार से वाक़िफ हो, हम तेरे इनकार से वाक़िफ हैं।डूबा नहीं सकती कोई लहर मेरी काग़ज़ की नाव को,तुम किनारे से वाक़िफ हो, हम मझधार से वाक़िफ हैं।
कृष्णा सोलंकी