जग में रहकर तू जग भूला, धरती भूला अम्बर भूला, भूल गया पहचान,

इस चार इंच की दूनिया की, झूठी हवा, मक्कार फिज़ा और ढोंगी इंसान।


कृष्णा सोलंकी