संचय और संशय के बीच
आशा और उम्मीद के बीच
जागृति और होश के बीच
वर्तमान और भविष्य के बीच
गतिमान होने और रुकने के बीच
कहीं रुकी है जिंदगी
कोलाहल और शांति के बीच
परिवार और प्रेम के बीच
अपने और उनके के बीच
मंदिर और दफ्तर के बीच
गर्व और दर्द के बीच
कहीं रुकी है जिंदगी
सच और सवालों के बीच
उत्साह और बावलों के बीच
तरक़्क़ी और घोटालों के बीच
जवाब और हवालों के बीच
सांस लेने और रोकने के बीच
कहीं रुकी है जिंदगी
नाम और परिणाम के बीच
धन और इंतजाम के बीच
नज़र और अनजान के बीच
अज्ञात और गुमनाम के बीच
प्रकट और अदृश्य के बीच
कहीं रुकीं है जिंदगी
मैं और मेरे बीच
कुछ होने और कुछ बन जाने के बीच
वस्त्र और आत्मा के बीच
यकीन और उम्मीद के बीच
चल देने और विश्राम के बीच
कहीं रकी है जिंदगी
जब एक तरफ हो जाता हूँ
दूसरी तरफ खो जाता हूँ ।।


