अधूरा प्रेम's image
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सृजन का बीज हूँ मिट्टी में ज़्यादा रह नहीं सकता, 
तेरी ख़ातिर मैं दुनिया से जु़दा अब रह नहीं सकता |

कर लूँगा मैं जीवन मुक्कमल अपने तन मन से, 
अभी जीवन से ज्यादा पा लूँगा ये कह नहीं सकता | 

तेरे साथ में हो सकती थी ये दुनियाँ मुट्ठी में, 

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