कभी सोचने बैठते हैं की इस जिंदगी की परिभाषा क्या हैं?!?

कभी किसी सुंदर से फूल का खिलाना जीवन लगता हैं!


जो धीरे-धीरे खिलता है इस बाग की दुनिया में

और अपनी यादें छोड़ जाता हैं खुश्बू के रुप में!



कभी लगता हैं किसी सिनेमा जैसा हैं ये जीवन,

हम अपना किरदार निभाते हैं रहकर बेखबर!


कभी लगे इश्वर की लिखी किताब हूं में,

जो खुद अंजान हूं अपने अगले कहानी के हिस्से से!


और सच कहूँ तो यूं अंजान रहना ही अच्छा हैं,

आश्चर्यचकित होने मे ही बडा मजा हैं!


क्या खुशी मिलेगी जब जान पायेंगे आनेवाला पल, जीवन ओर भी प्यारा लगता हैं जब इस में भरा हुआ हो विस्मय...!!

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#komaljoshiii