*तेरा साथ*
यूं तो ये सब माया का खेल लगे,
लेकिन तू दे अपनी हाजरी तो कुछ वृंदावन जैसा लगे..!
लगे कभी ये सजा और मथुरा की जेल लगे,
लेकिन स्मरण तेरा उसे गोकुल-द्वारिका बनाये रखे ..!
जिन्दगी के ताल पर ये नाच जैसा लगे,
लेकिन साथ तेरा हो तो ये यमुनकिनारे की रास लगे..!
प्रसादरुपी तांन्दूल लेकर आऊ मंदिर के प्रांगण मे,
में तेरी बालसखा और तू इस सुदामा को गले लगाने दौडता चला आए..!
जीवन के इस महाभारत मे में अर्जुन नासमझ,
और तू फ्रेंड-फिलोसोफर-गाइड बनकर मुझे राह दिखाये..!
कितना मधुर बन जाये जीवन और जीवन का देखाव,
जब-जब इसमे तेरा स्मरणरस मिल जाये..!
फिर भी इन आँखो को तेरे मनोहर दर्शंन की हैं अभिलाषा,
पुर्ण करके मेरे मन की आश दे इस कोमल आत्मा को धन्यता..!


