दिल से जीते हैं ..!


हर वक्त्त चलते रहना ही कितना लाज्मी हैं ?!

कहीं रुककर चैन की सांस लेना भी तो जिन्दगी हैं !


हार-जीत की कश्मकश में कहीं हम इतना न उलज़ जाये,

सारा जहाँ जीत जाये लेकिन कहिं जीना ही ना रह जाये !


सब कुछ याद करके गुमान में जो घूम रहे हैं,

ज़रा याद भी कर लेते हैं की कहीं जीना ही तो नही भूल गये हैं ?!


माना की जिंदगी हैं आगे बढ़ती ही रहतीं हैं लेकिन,

जिंदगी ही तो है; इसे अपने हाथों में थामना कहां मुश्किल हैं !?


आगे बढ़ते-बढ़ते ये भी थक सी गई होगी,

सुकून के शृंगार की उसे भी जरुरत होगी !


तो थोडा ठहरकर, थोडा टहलकर जिंदगी का मज़ा लेते हैं;

सुकूनभरी साँसो से और मीठी मुस्कुराहटों से जिंदगी को दिल से जीते हैं..!!!

~कोमल जोषी