नदी के बहते पानी जैसा मे और तू जैसे समंदर, तुझसे मिलने की एक आश बसी मेरे रोम-रोम के अंदर..!...
नदी के बहते पानी जैसा मे और तू जैसे समंदर, तुझसे मिलने की एक आश बसी मेरे रोम-रोम के अंदर..!.
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