Poetry 1 min read 780.9K reads

Bhram


ट्रेन में सफर करते वक़्त हमें "जुठा" भ्रम होता हैं की, पेड़, सूरज या चांद और तारें हमारे साथ चल रहे हैं; जीवन के सफर का भी कुछ ऐसा ही हैं!

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