एक स्त्री!♥️
एक स्त्री की जिंदगी कितनी बदल जाती है...
जब वह अपने बाबुल का घर छोड़ कर
अपने पिया के घर जाती है।
एक स्त्री जो अपने माँ-बाप के घर में
इतराया करती है,
बात-बात पर नखरे दिखाया करती है,
रूठ जाया करती है,
जरा सी चोट पर आँसू बहाया करती है,
हंसती है...खिलखिलाती है,
घर के आंगन को महकाती है....
वही स्त्री जब डोली में बैठ...
अपने पिया के घर जाती है,
तब उसके काँधे पर होता है
जिम्मेदारियों
का बोझ....
जिम्मेदारी दुसरे घर को संभालने की!
'बाबुल' के घर से
'पिया' के घर जब स्त्री जाती है
तो 'खुश' तोह रहती है
मगर वहाँ जा कर
वो 'जीना' भुल जाती है।।
'जीना' भुल जाती है।।
~कोमल


