आरजू है तेरी जुल्फों पर इख्तियार कर लूँ
फिर सोचता हूँ क्यूँ न इनको घरबार कर लूँ
तू भी फुरसत में है वक़्त है आज मुझे भी
तू गर दे इजाजत तो तुझे प्यार कर लूँ
मिरे लिखने की वजह आज रूबरू होगी
सोचता हूँ आज एक गज़ल तैयार कर लूँ
तरीका एक है जिससे बात वो कर ही लेगा
खुद को हद से ज्यादा मैं बीमार कर लूँ