कन्धों पर बोझ ,हाथो पर गहरे निशान है ।
हम सपनो को जमीन से उगाने वाले किसान है।
उम्मीद हमारी ही पहले सूली चढ़ गई।
उगाई हमारी रोटी हम पर महंगी पड़ गई।
अब सिर्फ सपनो में ही हमारा जहान है।
क्योकि हकीकत में तो हम किसान है।
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