मुस्कुराओ, साँसों को महसूस करो, कृतज्ञ रहो।
यही जीवन का मधुर सार है।
ऋतुएँ बदलती रहें, दिन विशेष आएँ या न आएँ,
स्नेह की धूप हर सुबह फैलती है।
उत्सव मनाया जाए या नहीं,
दिलों के बीच की गर्माहट बनी रहती है।
प्रेम कोई तिथि का मोहताज नहीं,
वह तो हर धड़कन में बसता है।
आज भी मिला है, कल भी मिलेगा—
क्योंकि प्रेम ही जीवन का सबसे सच्चा उपहार है।
#विकास_सिंघई