मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम , निराली नैय्या मैं खेता हूँ
कहीं चिता जलती मेरी, कहीं जनम मैं लेता हूँ
कहीं विवाह आलिंगन में अपने को खो देता हूँ,
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम, सागर बन मैं आयी हूँ
कहीं धूप मैं भीनी भीनी, कहीं बादल बन छाई हूँ
मैं इस जग की काल देवी, मैं इस जग की माई हूँ
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम,
कटते बकरे की आँखें हूँ मैं, और ईद मिलन की बाहें भी,
मैं कमसिन बाला की मुस्कान और बूढी कुबड़ी की आहें भी,मुझे कोसें कोटि कोटि जन और कोटि कोटि सराहें भी,
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
कहीं पूजा का ठंडा जल, कहीं जलती बाती हूँ मैं,
मैं हलकी हलकी मधुर पवन, कहीं आंधी कहलाती हूँ मैं,
जनम दिए मैंने बहुतेरे, इक माँ की बंजर साथी हूँ मैं,
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
उत्सुक वधु के कानों में, हर हलकी, हलकी आहट हूँ मैं,
कई चूड़ियाँ रंग बिरंगी, उनकी खनखनाहट हूँ मैं,और उनके टुकड़े टुकड़े में, नव विधवा की घबराहट हूँ मैं,
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
मंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरूद्वारे, धरम की मैं माटी हूँ
झेले कुकर्म के अंधियारे, उनकी भी मैं घाटी हूँ
सब सच जानूं मैं सदियों के, इतिहास की सहपाठी हूँ
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
भारत हूँ मैं आदिकाल से, हिन्दुस्तां भी कहलाती हूँ
शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय, ब्राह्मण, मैं हर किसी की जाती हूँ
हर सूखे पेड़ की मैं डाली, हर हरे पेड़ की पाती हूमेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
तुम माँ मानों मुझको या ना, संतान हो तुम सब मेरी
करोड़ो मरे, करोडों जन्मेंगे, अनगिनत देखि मैंने फेरीमेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
मेरे सुख दुःख क्या जानो तुम
- किशोर अस्थाना

