
मैं, भैरव
साधारण सा मानस था
थी घेरे बैठी माया भैरव
नीलकंठ बाराती बन
चिलम पी मंडराया भैरव
रंग बिरंगे जग का सपना
पाया माया साया भैरव
झूमा दो आँखें मीचे
तीजे में भाया भैरव
डमरू की दग डग सुन
पागल डगमगाया भैरव
नया, पुराना टूटा सारा
खँडहर भी ढाया भैरव
भक्ति भाव मैं भैरव,
भैरव भज
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