सब चले हैं अपनी अपनी जन्नत की तरफ
कुछ इस ओर हैं, कुछ उस ओर
न पाएंगे जन्नत ये तमाशाई
न वो इस छोर है, न उस छोर
आओ मंजधार में, जन्नत प्यारी है अगर
यहीं खुदा है, परमेश्वर वो ही
और वोही तुम हो, काया माया के पार
सब एक हैं यहाँ, दूजा ना कोई
क

सब चले हैं अपनी अपनी जन्नत की तरफ
कुछ इस ओर हैं, कुछ उस ओर
न पाएंगे जन्नत ये तमाशाई
न वो इस छोर है, न उस छोर
आओ मंजधार में, जन्नत प्यारी है अगर
यहीं खुदा है, परमेश्वर वो ही
और वोही तुम हो, काया माया के पार
सब एक हैं यहाँ, दूजा ना कोई
क