कलम की नोक पर जीवन,
लिखी है हम दीवानों ने ।
हमारी मंजिलें स्याही से ,
है कुछ कर दिखाने की ।
वतन के काम आने की ,
वतन पर जां मिटाने की ।
हमारी मंजिलें जग में ,
ये सरगम छोड़ जाने की ।
बुरा है जग हुआ तो क्या ?
हमें खुद को बदलना है ।
अमन और चैन के रस्ते ,
सभी के संग चलना है ।
मंज़िलें साथ पाएंगे,
युद्ध भी आज़माएंगे ।
मगर जब बात हो तेरी,
वो मंज़िल छोड़ आएंगे।
कलम की नोक पर जीवन ,
लिखी है हम दीवानों ने ।
हमारी मंजिले स्याही से ,
है कुछ कर दिखाने की ।


