घमंडियों के बीच रहता हूं

तुम भी तो रहते हो ।।


अपमान सहता रहता हूं

तुम भी तो सहते रहते हो ।।


उपेक्षित होता रहता हूं

तुम भी तो होते रहते हो ।।


प्रेरित होता रहता हूं

तुम भी तो होते रहते हो।।


कर्मठ होता रहता हूं

तुम भी तो होते रहते हो।।


मैं और तुम हैं एक से,

हमारे अनुभव एक से।।


अगर मुझे और तुम्हें,

परखने वाले एक से ।।



© किशन लाल रोहिल्ला