Poetry 1 min read 800.9K reads

KK writes


आंखों में वो रवानी ना रहीइंतजार, अब वक्त का ज़ुल्म है ,

तुम दुर हो, ख़्वाब अंधेरा है,तुमसे मेरी कहानी ना रही ।

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