मित्रता में फर्क़ न किसी का

सुग्रीव के मित्र बने ज्यूँ रामा,


धन वैभव पर आश्रित नहीं

कृष्ण के दिल में बसे सुदामा,


जन्म से तो सहोदर मिलते

दिल्लगी से बनता है याराना,


जाति-पाति का भेद न जाने

यारी में कोई देखे न घराना 


©️निश्छल किसलय