मिलते रहे ,साथ चलते रहे

दिल में जज्बातों की धड़क मध्यम थी ,


मैं हर वक़्त मयस्सर था 

बस उनकी गुहार में कसक कम थी,


मुस्कराते हुए गुज़र गए

रुख़सार थे गीले और आँखे नम थी,


सच था या मेरी तरह झूठी

पर वो तेरी मुस्कान बहुत बेरहम थी,


मेरे बग़ैर तेरा सफ़र शुरू हुआ

वहीं मेरे उल्फ़त की हयात ख़तम थी ,


दर्द अकेला मेरा नहीं "निश्छल"

बिछड़ते वक़्त तेरी भी चाल बेदम थी,


@निश्छल किसलय