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ताक़-ए-आँख पर सजा रखें थे..



ताक़-ए-आँख पर 

सजा रखें थे तुम्हारे ख़्वाब

आज ये आँसू बनकर

चश्म-ए-एहसास से

दामन में बिखर गए..

किसी खि

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