तरन्नुम सा घुल जाता है फ़ज़ा में 
गुनगुनाने लगता है ये मौसम
नसीम कोई छू कर मुझे 
तुम्हारे लम्स के एहसास जगाती है
तितलियों की गुलों से सरगोशियां
धडकनों को गुदगुदाती हैं
मेरे साँसों की तरतीब 
बिगड़ जाती है मेरे जानाँ
जब तुम किसी वरक़ पर
लिखते हो... नाम मेरा !!

किरण के. ✍
Read more Earn more Learn more