सुबह सवेरे ये कैसे बादल छाए
जो दिनभर बैचेनियां दे गए। खता हो गई हमसे जो तुम से रूठ गए सारा दिन चाह कर भी तुम से बात ना कर पाए। सोेचा की बादल बरसेगें रूठे जनाब हम पर मेहरबानं हो जाएे। सारा दिन एेसे गुजर गया हम सितारो की चादर ओड़ कर सो गए।

सुबह सवेरे ये कैसे बादल छाए
जो दिनभर बैचेनियां दे गए। खता हो गई हमसे जो तुम से रूठ गए सारा दिन चाह कर भी तुम से बात ना कर पाए। सोेचा की बादल बरसेगें रूठे जनाब हम पर मेहरबानं हो जाएे। सारा दिन एेसे गुजर गया हम सितारो की चादर ओड़ कर सो गए।