पल पल रंग बदलती ज़िन्दगी, हर राह मोड बदलती ज़िन्दगी, रंगमंच का सारा खेल, एक ही ज़िन्दगी में दिखाती ज़िन्दगी।   कभी मयखाने के ख़ाली पात्र सा, कभी जारे में खिलखिलाती धूप सा, कभी भोर की पहली उजियारी सा, कभी ठंड रात के सुकून सा, कभी डुबाती, कभी उबारती ज़िन्दगी, पल पल रंग बदलती ज़िन्दगी।   रात भर क्षुद्रित श्वान के मुख की रोटी सी, बार बार संभल गिर गंत्व्य को पहुँचती चींटीं सी, तिनका तिनका जोड आशियाना बनाती पंछी सी, कभी शिकार की ताक लगाए एक्राग बैठी सिंहनी सी, कभी हिम्मत तोडती, कभी हौंसला जोडती ज़िन्दगी, पल पल रंग बदलती ज़िन्दगी।।   ताश के पत्तों का घरौंदा बनाती, रेत पर कुछ यूँ ही लिखती मिटाती, पर्वत के पीछे से आती वेग नदी की, मरू स्थल की कोई मृग तृष्णा सी, कभी चित्रहीन, कभी चित्र पट सी ज़िन्दगी, पल पल रंग बदलती ज़िन्दगी।।।   बालपन की हठी, युवावस्था का जोश, अधेड उम्र का संयम, वृद्धावस्था के श्वेत केश, कभी जन्म का उत्सव, कभी मृत्यु की मय्यत सी ज़िन्दगी, पल पल रंग बदलती ज़िन्दगी।।।।