वो सिसकती रातें, 

वो बहकती बातें,

वो रूप का बदलना,

वो उम्र का ढलना,

देखता सब वक़्त हैं।

बचपन की ठिठोली,

जवानी की मनमर्ज़ी,

बुढ़ापे की मजबूरी,

सहता सब वक़्त हैं।

आँसूँ आँखों का,

मरहम ज़ख़्मों का,

ख़ुशी होठों की, 

मायूसी चेहरे की,

सब वक़्त हैं।

हे अंतरिक्ष मानव!

ना कर घमंड किसी का,

तुझसे तो बलवान

वो वक़्त हैं।।।।।