जिस उन्स को अक़ीदत जान इबादत की, क्या ग़म करें यूँ ज़ब वाबस्ता ही फ़रेब निकला । अब नज़ात दिला दे कोई हाफ़िजा से सारे, क्यों करें कोई गिला ज़ब वादा मेरा ही क़फ़स निकला ।।